Sunday, 21 July 2019

कानूनी अधिकार संगठन ने निठारी गांव को दिया निशुल्क परामर्श

कानूनी अधिकार संगठन एलआरओ द्वारा 21 जुलाई  रविवार को निठारी गांव की एसएससी लाइब्रेरी में निशुल्क कानूनी सहायता शिविर का आयोजन किया गया।

शिविर में उपस्थित  कानून के विशेषज्ञ वकीलों के पैनल ने लोगों की समस्याओं  के कानूनन निबटारे के लिए  समाधान हेतु लोगों को अवगत कराया इसमें कानूनी अधिकार संगठन की तरफ से   सर्व श्री रण पाल अवाना रीना राय सुनील कुमार शर्मा सीबी सक्सेना  अंजू शर्मा नीतू वर्मा शारदा चतुर्वेदी ओंकार शर्मा घनश्याम मिश्रा आदि ने  लोगों को अवगत कराया की कानूनी अधिकार संगठन निशुल्क कानूनी परामर्श देकर किस तरह आमजन को लाभान्वित कर रहा है  जिसमें  कानून के दायरे में आने वाली समस्याएं,  बच्चों की शिक्षा को लेकर कानूनी अधिकार, उपभोक्ता संरक्षण के मामले,   लोगों की विभिन्न समस्याओं की प्राथमिकी शिकायत पुलिस प्रशासन में न दर्ज किए जाने की स्थिति में क्रमवार कार्यवाही तथा किसी भी तरह की कानूनी सहायता को आगे बढ़ाने के लिए सूचना के अधिकार को उपयोग करते हुए विभागों से सूचना एवं जानकारी प्राप्त करने के लिए विस्तृत रूप से बताया गया.

  साथ इसके अलावा जिस विशेष घटना ने निठारी शब्द को अंतरराष्ट्रीय मीडिया में अकारण ही D5 सेक्टर 31 में हुए जघन्य हत्याओ और नर कंकाल की बरामदगी से गांव सुर्खियों में लाया.  निठारी गांव से संबंधित ना होने के बावजूद  अकारण ही  भावनाओं की उत्तेजना में बहकर मीडिया द्वारा निठारी कांड का नाम दिया गया. जिसका शिविर में गांव के प्रतिष्ठित बुजुर्गों और सभी लोगों ने कानूनी अधिकार संगठन के शिविर में विरोध दर्ज कराया.

निठारी गांव के दर्द और विरोध पर कानूनी अधिकार संगठन द्वारा हर संभव कानूनी परामर्श शासन-प्रशासन प्रशासन व सरकार में विरोध दर्ज कराने आदि के लिए पूर्ण कानूनी सहायता देने का आश्वासन दिया ताकि निठारी गांव कि जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनामी हुई है  और उसकी वजह से  गांव के लोगों को अपमानित होना पड़ता है. 
गांव पर लगे इस कलंक को धोने के लिए कानूनी अधिकार संगठन निठारी गांव को हर संभव कानूनी सहायता निशुल्क प्रदान करेगा.

कार्यक्रम की संयोजक श्रीमती विमलेश शर्मा प्रधान निठारी गांव ने संगठन से कहा,  समस्त गांव वासियों की निठारी कांड और उससे उपजे बदनामी के शब्द का लगातार इस्तेमाल  स्थानीय निवासियों के आत्मसम्मान को झिजोङ  कर रख देता है.

इसके समाधान के लिए कानूनी समस्या समाधान  शिविर की अध्यक्षता कर रहे  श्री रणपाल अवाना एडवोकेट ने  निठारी गांव को यथासंभव कानूनी सहायता के लिए आश्वस्त किया और किसी भी प्रकार के अग्रिम कार्रवाई के लिए आमंत्रित किया।

मंच का सफल संचालन श्री अजय शर्मा ने किया. कानूनी अधिकार संगठन क्या है और कैसे काम करता है इस पर जानकारी शारदा चतुर्वेदी ने दी.

संगठन कानूनी रूप से  आम लोगों की किस तरीके से मदद कर रहा है इस पर विस्तृत जानकारी सुप्रीम कोर्ट की अधिकता रीना राव ने दी.  निठारी गांव क्या है और उसकी सांस्कृतिक धरोहर क्या है और सभी गांववासी निठारी कांड शब्द का इस्तेमाल न करने का संकल्प लें इस पर सचिन दुबे ने अपने विचार रखे. शिक्षा का अधिकार और स्कूलों की मनमानी रोकने के लिए कानूनी अधिकार पर जानकारी नीतू वर्मा ने दी.  कार्यस्थल पर यौन शोषण पर कानूनी अधिकार को लेकर जानकारी अंजू शर्मा ने दी.

निशुल्क  कैंप में सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र 11 वर्षीय बालिका रही जिसमें अपने और अपनी दो सहेलियों के परिवार में घरेलू हिंसा से होने वाले तनाव पर कानूनी सलाह मांगी.

कार्यक्रम की संयोजक विमलेश शर्मा ने संगठन को धन्यवाद दिया एवं संगठन की तरफ से धन्यवाद  संबोधन रण पाल अवाना ने  दिया.

कार्यक्रम में छवी गोयल सचिन दुबे  राम शरण शर्मा आरके शर्मा मुख्य रूप से उपस्थित

Sunday, 14 July 2019

कानूनी अधिकार जो महिलाओं के लिए है

वे कानूनी अधिकार जिनकी जानकारी होनी है बेहद ज़रूरी

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं और साथ ही संविधान में मिले अधिकारों और अवसरों का भरपूर लाभ उठा रही हैं। घर की रसोईं छोड़ औरत दहलीज से बाहर निकली है। कॉलेज जाती है, नौकरी करती है, मेहनत करती है, घर चलाती है और भविष्य को लेकर गंभीरता से सोचने की हैसियत रखती है। ऐसे में उसके आसपास कुंठित अपराधों का तेजी से बढ़ना एक सामान्य बात हो गई है, लेकिन ज़रूरत है उन अपराधों और महिला अधिकारों के प्रति जागरुक रहने की।
  

कई बार ऐसा होता है, कि औरत खुद में ही अपनी परेशानी झेलती रही है, किसी से कुछ नहीं कहती इस डर से कि कुछ हो नहीं सकता, कोई कर भी क्या लेगा, लेकिन ठहरिये आप शायद ये भूल रही हैं कि आपको ऐसे कई अधिकार प्राप्त हैं जिनकी जानकारी आपको नहीं है।


मार्च 1972 में, एक आदिवासी लड़की का पुलिस थाने में ही पुलिसकर्मियों ने बलात्कार कर दिया था। इस मामले में शोर इसलिए मचा था, क्योंकि जिन पर लड़की की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी उन्होंने ही उसके साथ गलत किया। एशियन सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स के मुताबिक साल 2005 से 2010 के बीच पुलिस थानों में बलात्कार के लगभग 40 मामले सामने आये थे, जबकि ये भी सच है कि जितने मामले सामने आते हैं उससे कहीं अधिक घटित हुये होते हैं। यदि हम सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों पर जायें तो किसी भी महिला को सूरज डूबने के बाद या सही शब्दों में कहें तो शाम 5:30के बाद थाने में नहीं रखा जा सकता और तो और पूछताछ के दौरान महिला के साथ किसी महिला अफसर की उपस्थिति भी अनिवार्य है, लेकिन देखा जाता है महिलाओं को फिर भी परेशान किया जाता है और इस तरह के मामलों में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है, जिसकी सबसे बड़ी वजह है कानूनी अधिकारों की सही जानकारी का न होना।


महिलाओं को एेसे बहुत सारे अधिकार प्राप्त हैं, जिनकी जानकारी के अभाव में उन्हें अक्सर परेशान होना पड़ता है। तो आईये जानते हैं उन कानूनी अधिकारों के बारे में जिनके बारे में उनका जागरुक होना बेहद ज़रूरी है-


औरत कर सकती है किसी भी पुलिस स्टेशन में FIR


छेड़छाड़, बलात्कार या किसी भी तरह के उत्पीड़न संबंधी फर्स्ट इन्फॉरमेशन रिपोर्ट (FIR) किसी भी थाने में दर्ज कराई जा सकती है, भले ही अपराध संबंधित थाना क्षेत्र में हुआ हो या न हुआ हो। वह थाना उस रिपोर्ट को संबंधित थाने को ट्रांसफर कर सकता है। केंद्र सरकार ने निर्भया मामले के बाद सभी राज्यों को अपराध होते ही जीरो एफआईआर करने को कह दिया था और पुलिस यदि किसी महिला की शिकायत दर्ज करने से मना कर दे तो संबंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।


औरत को प्राप्त है उसकी निजता का अधिकार


किसी भी मामले में नाम आने पर पुलिस या मीडिया किसी के भी पास ये अधिकार नहीं है, कि वे संबंधित महिला का नाम उजागर करें। पीड़िता का नाम उजागर करना भारतीय दंड संहिता के तहत दंडनीय अपराध है। ऐसा पीड़िता को सामाजिक उत्पीड़न से बचाने के लिए किया जाता है। बलात्कार की शिकार महिला अपना बयान सीधे-सीधे जिला मजिस्ट्रेट को दर्ज करा सकती है, जहां किसी और की उपस्थिति ज़रूरी नहीं है।


औरत के लिए अॉनलाइन शिकायत की भी सुविधा है मौजूद


यदि किसी वजह से महिला पुलिस स्टेशन नहीं जा सकती है या फिर उसे इस बात का डर है कि बाहर निकलने से अपराधी उसे फिर से कोई नुकसान पहुंचा देगा तो ऐसे में संबंधित महिला मेल या डाक के द्वारा डिप्टी कमिश्नर या कमिश्नर स्तर के किसी अधिकारी के सामने लिखित में अपनी शिकायत दर्ज करा सकती है। शिकाय मिलने के बाद वो अफसर/अधिकारी संबंधित थानाधिकारी को मामले की सच्चाई को परखने की कार्रवाई का निर्देश देता है। मेल द्वारा शिकायत करना काफी आसान है। अॉनलाइन फॉर्म भरने के बाद महिला को एक एसएमएस प्राप्त होता है, जिसमें एक ट्रैकिंग नंबर भेजा जाता है।


FIR दर्ज कराने से पहले औरत अपने लिए मांग सकती है डॉक्टरी सहायता


पहले बलात्कार पीड़िता की मेडिकल जांच पुलिस में मामला दर्ज होने के बाद होती थी, लेकिन अब फॉरेंसिक मेडिकल केयर फॉर विक्टिम्स अॉफ सेक्सुअल असॉल्ट के दिशा निर्देशों के अनुसार बलात्कार पीड़िता FIR दर्ज कराये बगैर भी डॉक्टरी परीक्षण के लिए डाक्टर मांग सकती है। कुछ मामलों में तो पुलिसकर्मी ही पीड़िता को जांच कराने के लिए हॉस्पिटल ले जाता था। अब मेडिकल मुआयना करवाने से पहले पीड़िता को डॉक्टर को सारी प्रक्रिया समझानी होती है और उसकी लिखित सहमति लेनी होती है। पीड़िता यदि चाहे तो मेडिकल टेस्ट देने से मना भी कर सकती है।


मुफ्त कानूनी मदद का अधिकार 


जिस महिला का बलात्कार हुआ है, वो कानूनी मदद के लिए मुफ्त मदद मांग सकती है और ये जिम्मेदारी स्टेशन हाउस अधिकारी की होती है, कि वो विधिक सेवा प्राधिकरण को वकील की व्यवस्था करने के लिए जल्द से जल्द सूचित करे।

साथ ही यौन उत्पीड़न के अलावा महिलाओं के और भी ऐसे कई अधिकार हैं, जिनकी कानूनी तौर पर जानकारी बेहद ज़रूरी है, जैसे- पारिश्रमिक अधिकार, कार्य क्षेत्र में उत्पीड़न के खिलाफ अधिकार, घरेलू हिंसा के खिलाफ अधिकार, कामकाजी महिलाओं के लिए मातृत्व लाभ संबंधी अधिकार, भ्रूण हत्या के खिलाफ अधिकार और पुश्तैनी संपत्ति अधिकार।

हमारा कानून उतना भी हल्का नहीं है कि अपराधी अपराध करके बच निकले। बस कमी शिक्षा और ज्ञान की है, साथ ही हमारी सामाजिक संरचना इस तरह की है, कि बदनामी जैसा डर भी औरत को परेशान करता है। वो सोचती है, समाज क्या कहेगा, लोग क्या कहेंगे, घर वाले क्या कहेंगे, पति बच्चे सब क्या सोचेंगे... तो इन सभी बातों को एक तरफ रखकर अपने साथ होने वाले हर अत्याचार के खिलाफ आवाज़ उठायें। लेकिन साथ ही इस बात का भी खयाल रखें, कि कानून से मिले इन अधिकारों का कभी गलत इस्तेमाल न करें। सिर्फ किसी को नीचा दिखाने या किसी को परेशान करने के लिए किसी निर्दोश को सजा न होने दें। क्योंकि ये प्रक्रियाएं खेल या ट्रायल के लिए नहीं बनीं है। यदि कोई अवांछनीय घटना आपके साथ घटी है तो खामोश न बैठें, क्योंकि अपराधी को सजा दिलाना आपका कानूनी अधिकार है।

Tuesday, 9 July 2019

ट्रैफिक नियमों को तोड़ा पकड़ लेगा ऑटोमेटिक डिटेक्टर

ट्रैफिक नियमों को तोड़ा तो पकड़ लेगा ऑटोमैटिक ट्रैफिक डिटेक्टर 

देश में पहली बार रडार की टेक्नोलॉजी से लैस अत्याधुनिक ऑटोमैटिक ट्रैफिक डिटेक्टर यातायात के नियमों की धज्जियां उड़ाने वालों पर नकेल कसने के लिए उत्तर प्रदेश के नोएडा शहर में लगाया जा चुका है। इसकी खासियत यह है कि रात के घने अंधेरे में भी 500 मीटर की दूरी की रेंज में आने वाले वाहनों को यह 100 फीसदी डिटेक्ट कर लेता है। 

आपको बता दें कि यह टेक्नोलॉजी यूरोपीय देशों और दुबई में ट्रैफिक नियमों को तोड़ने वाले चालकों को सबक सिखाने का काम बखूबी कर रही है। उसी पैटर्न पर नोएडा यातायात पुलिस ने इस तकनीक को लागू करने की योजना बनाई है। अभी इसको ट्रायल के बतौर 20 मई 2019 से नोएडा में इस्तेमाल किया जा रहा है। अपने परीक्षण के दौरान ही इसने कामयाबी के झण्डे गाड़ने शुरू कर दिए हैं। एक सप्ताह के अंदर ही इसने 1200 वाहनों को नियमों की अनदेखी करते हुए पकड़ा। नियमों को ठेंगा दिखाने वाले इन वाहन स्वामियों को नोएडा यातायात पुलिस ने उनके एड्रेस पर चालान भेजे हैं। जिसने यातायात पुलिस के मनोबल को उचा किया है। 

जिला गौतमबुद्ध नगर के एसपी ट्रैफिक अनिल कुमार झा ने पुलिस मीडिया पत्रिका को बताया कि फ्रांसिसी कंपनी की इस तकनीक को अभी परीक्षण बतौर नोएडा के महामाया फलाईओवर के नजदीक दलित प्रेरणा स्थल के पास लगाया गया है। यह उपकरण देखने में खंभानुमा है और रात के समय भी 500 मीटर के दायरे में आने वाले वाहनों की नंबर प्लेट पढ़ने में सक्षम है। जबकि यमुना एक्सप्रेसवे पर इंफ्रारेड कैमरे सिर्फ 30 से 35 फीसदी ही वाहनों की नंबर प्लेट पढ़ने में कामयाबी हासिल कर पाते हैं। अनिल कुमार झा बहुत ही उम्मीद भरे लहजे में कहते हैं कि परीक्षण सफल होने पर इस नई रडार तकनीक को नोएडा में विभिन्न प्रमुख मार्गां जैसे एलीवेटेड रोड, एक्सप्रेसवे रोड पर उपयोग करने के लिए प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा।  

यानि कि नोएडा यातायात पुलिस ट्रैफिक  के नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले वाहन चालको को नियंत्रित करने करने के लिए पूरी तरह से कमर कस चुकी है। जिसके लिए वह हाईटेक होने जा रही है। यातायात पुलिस की उम्मीद परीक्षण सफल होने पर टिकी है। यदि यह प्रयोग सफल रहा तो लापरवाह और यातायात नियमों को ठेंगा दिखाने वालों की खैर नहीं है। 

Saturday, 6 July 2019

निठारी गांव को निठारी कांड से ना पहचाना जाए

निठारी गांव को निठारी कांड से ना जाना जाए:  एल आर

आज दिनांक 06-07-2019 को सेक्टर 104 नोएडा मैं कानूनी अधिकार संगठन की मीटिंग श्री रणपाल अवाना एडवोकेट जी के ऑफिस पर हुई । जिसमें सभी लोगो की सहमति से दिनांक 21-07-2019 को एस0एस0सी0 लाइब्रेरी निठारी गांव सेक्टर 31 नोएडा मैं शाम 4 बजे निःशुल्क कानूनी सलाह , समस्या और समाधान शिविर कार्यक्रम की कार्यशाला आयोजित करनी तय हुआ । जिसमे  कार्यक्रम संयोजक विमलेश शर्मा जी प्रधान होगी जो कि  गांव की प्रधान है ।
   
आज चर्चा के बिंदुओं में निठारी गांव पर मुख्यतः चर्चा हुई.  जिसमें निठारी गांव की प्रधान विमलेश शर्मा ने कहा इस बात का बेहद दुख है निठारी गांव को निठारी कांड के नाम से जाना जाता है जबकि वह हादसा D5 कोठी में हुआ था और उसमें निठारी गांव के किसी भी बच्चे का कोई संलिप्तता नहीं थी. उस हादसे में सभी बच्चे बाहर के बच्चे थे.  निठारी कांड के नाम की वजह से गांव को एक कलंक की अनुभूति होती है और गांव की विश्वसनीयता खत्म हो रही है.  

संगठन की सदस्य शारदा चतुर्वेदी ने कहा की निठारी गांव को दुनिया के सामने लाने के लिए निठारी मेला लगाया जाए जिसमें इसकी सांस्कृतिक धरोहर बताई जाए.  इससे देशवासियों को निठारी गांव के बारे में संपूर्ण जानकारी मिलेगी और निठारी के ऊपर लगा हुआ कलंक धुल जाएगा.

एडवोकेट रण पाल अवाना ने कहा की कानूनी अधिकार संगठन मीडिया से अपील करते हुए कहता है कि हम निठारी कांड जैसे नकारात्मक शब्द का विरोध करते हैं. इस शब्द में पूरे गांव की सांस्कृतिक छवि को धूमिल कर दिया है.

एडवोकेट सुनील शर्मा जी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि इस शब्द की वजह से आज गांव के अंदर शादी ब्याह में भी दिक्कतें आती हैं इसलिए निठारी कांड शब्द का विरोध होना चाहिए निठारी गांव की अपनी अलग पहचान है और वह दुनिया के सामने आनी चाहिए.

पत्रकारों के सामाजिक सशक्तिकरण एवं अधिकारों की बात करते हुए अजय शर्मा ने कहा कि पत्रकारों के लिए मीडिया आयोग बनना चाहिए और जल्दी इसके ऊपर ठोस रणनीति बनाते हुए सरकार तक अपनी बात पहुंचाई जाएगी.

         इस मौके कानूनी अधिकार संगठन मैं निम्न अति सम्मानित साथियों को सदस्यता दी श्रीमति विमलेश शर्मा प्रधान, शारदा सिंघल और अखिल भारतीय खत्री महासभा  के  युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष अरविंद अरोड़ा जी ।

       इस मौके पर श्रीमती रीना राय जी एडवोकेट सुप्रीम कोर्ट , श्री सुनील शर्मा जी एडवोकेट , श्री अजय शर्मा जी लेखक एवं साहित्यकार , श्री राम शरण शर्मा जी , श्री गौरव यादव, श्री  कैलाश शाह जी , श्रीमती शारदा चतुर्वेदी, नीतू वर्मा एडवोकेट,  श्री  रणपाल अवाना एडवोकेट , श्री सी0 बी0 सक्सेना एडवोकेट,श्री संदीप त्यागी एडवोकेट (सेक्टर 33 रजिस्ट्री ऑफिस ) , श्री हैबर एडवोकेट , श्रीमति अंजू शर्मा और श्री राम शरण शर्मा जी आदि सम्मानित साथी मौजूद रहे ।

पुलिस गिरफ्तारी से जुड़े अधिकार

गिरफ़्तारी किसी व्यक्ति को उसकी अपनी स्वतंत्रता से वंचित करने की प्रक्रिया को बोलते हैं। साधारण तौर पर यह किसी अपराध की छानबीन के लिए, किसी अपराध को घटने से रोकने के लिए या किसी व्यक्ति या व्यक्तियों की हानि होने से रोकने के लिए किया जाता है। मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा के अनुच्छेद 9 के अनुसार "किसी को भी मनमाने ढंग से गिरफ़्तार, नज़रबंद, या देश-निष्कसित नहीं किया जाएगा।"


गिरफ्तारी के समय

अगर कोई महिला पुलिस की दृष्टि में 'अपराधी' है और पुलिस उसे गिरफ्तार करने आती है तो वह अपने इन अधिकारों का उपयोग कर सकती हैं-

उसे गिरफ्तारी का कारण बताया जाए।

गिरफ्तारी के समय उसे हथकड़ी न लगाई जाए। हथकड़ी सिर्फ मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही लगाई जा सकती है।


अपने वकील को बुलवा सकती है।


मुफ्त कानूनी सलाह की माँग कर सकती है, अगर वह वकील रखने में असमर्थ है।


गिरफ्तारी के 24 घंटे के अंदर महिला को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करना अनिवार्य है।


गिरफ्तारी के समय स्त्री के किसी रिश्तेदार या मित्र को उसके साथ थाने जाने दिया जाए।


अगर पुलिस महिला को गिरफ्तार करके थाने में लाती है तो महिला को निम्न अधिकार प्राप्त हैं

गिरफ्तारी के बाद उसे महिलाओं के कमरे में ही रखा जाए।

उसे मानवीयता के साथ रखा जाए, जोर-जबरदस्ती करना गैरकानूनी है।


पुलिस द्वारा मारे-पीटे जाने या दुर्व्यवहार किए जाने पर मजिस्ट्रेट से डाक्टरी जाँच की मांग कर सकती है।


महिला की डाक्टरी जाँच केवल महिला डॉक्टर ही करे।


महिला अपराधियों के साथ पूछताछ के दौरान कभी-कभी छेड़छाड़ के मामले भी सामने आते हैं। इसके लिये महिला इन अधिकारों का प्रयोग कर सकती है-

पूछताछ के लिए थाने में या कहीं और बुलाए जाने पर महिला इंकार कर सकती है।

पूछताछ केवल महिला के घर पर तथा उसके परिवार के सदस्यों की उपस्थिति में ही की जाए।


उसके शरीर की तलाशी केवल दूसरी महिला द्वारा ही शालीन तरीके से ली जाए।


अपनी तलाशी से पहले वह स्त्री, महिला पुलिसकर्मी की तलाशी ले सकती है।


जीवन संत गाडगे जी महाराज जैसा होना चाहिए: लोकेश चौधरी

   गाजियाबाद: महानगर कांग्रेस कमेटी कार्यालय कंपनी बाग पर संत गाडगे जी महाराज की जयंती पर चित्र पर पुष्प अर्पित कर विचार गोष्ठी की गई जिसमें...