Friday, 19 November 2021

कृषि बिल वापस लेना समाजवादी दर्शन की जीत है: अजय शर्मा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अचानक कृषि कानून बिल को वापस लेने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए समाजवादी पार्टी साहिबाबाद गाजियाबाद से मीडिया प्रवक्ता अजय शर्मा शर्मा ने कहा कि यह सत्य ,न्याय और अहिंसा की  जीत है ,उन्होंने कहा कि अगर प्रधानमंत्री समय से पहले कृषि कानून पर किसानों से बैठकर के विचार विमर्श करने के बाद कृषि बिल लाते या समय पर कृषि बिल को वापस ले लेते तो सैकड़ों किसान शहीद होने से बच जाते.  यह बहुत ही दुखद है की किसानों को स्वतंत्र भारत में अपने अधिकारों के लिए कुर्बानी  देनी पड़ी. 
 उन्होंने कहा अपनी रोजी-रोटी के हक की लड़ाई लड़ने का स्वतंत्र भारत में प्रत्येक नागरिक को अधिकार है और कृषि बिल को लेकर जो किसान  आंदोलनरत थे वह वही कर रहे थे इसमें किसी तरह की कोई राजनीतिक द्वेष नहीं था, जो लोग यह प्रोपेगेंडा कर रहे हैं कि कृषि बिल वापसी को लेकर जो आन्दोलन कर रहे थे वह किसान नहीं है वह पूरी तरह से गलत है । 

 अजय शर्मा ने कहा कि आखिर पीएम को  एहसास हुआ , खैर देर आये और दुरूस्त आये., साथ ही उन्होंने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा की भाजपा सरकार बनते ही किसान को दिए जाने वाले बोनस बंद क्यों कर दिया गया या फिर किसान की जमीन को उचित मुआवजा कानून का अध्यादेश लाकर समाप्त करने का षड्यंत्र नहीं था .इसके साथ ही प्रधानमंत्री को अपने वादे के अनुसार किसान को उसकी लागत का 50 फ़ीसदी मुनाफा देना चाहिए .किंतु ऐसा नहीं किया गया .फिर इसको किसान क्या माने .साथ ही भारत सरकार के एनएसओ के मुताबिक किसान की औसत आय 27 रुपया प्रतिदिन रह गई हो और देश के किसान पर औसत कर्ज 74,000 रुपया हो तो सरकार और देश के हर व्यक्ति को दोबारा सोचने पर मजबूर होना पड़ता है. जबकि प्रधानमंत्री ने कहा था कि वह खेती को हर स्तर पर मुनाफे का सौदा बनाना चाहते हैं और किसान को उसकी फसल का सही कीमत दिलाएंगे पर ऐसा नहीं है.  उन्होंने कहा कि किसान और मजदूर को न्याय अधिकार चाहिए .और यह सबका संवैधानिक कर्तव्य है कि वह प्रजातंत्र में कोई भी निर्णय  सबसे चर्चा कर सभी की सहमति और विपक्ष के साथ राय मशबिरे के साथ लिया जाए.

उम्मीद है कि पीएम भविष्य में  राज्य सरकारों ,किसान संगठनों, तथा विपक्षी दलो से सहमति बनाएंगे, उन्होंने कहा कि किसानों का आंदोलन गांधीवादी आंदोलन था जो समाजवाद के अलग लगए हुए था.... जो वर्तमान समय में भी प्रसांगिक है,  उन्होंने कहा कि भाजपा के लोगों को मालूम होना चाहिए कि सत्ता सेवा का माध्यम है न कि कोई व्यवसाय और व्यवसाय ही करना है तो अपना रास्ता कोई और चुनते. किसान आंदोलन में लोहिया जी के विचारों और दर्शन को जीवंत किया. 

साथ ही प्रधानमंत्री को अपना निर्णय वापस लेना यह साबित करता है कि हम समाजवादी विचारों पर चलकर आज भी दुनिया का कोई भी लडाई जीत सकते हैं ।

No comments:

Post a Comment

जीवन संत गाडगे जी महाराज जैसा होना चाहिए: लोकेश चौधरी

   गाजियाबाद: महानगर कांग्रेस कमेटी कार्यालय कंपनी बाग पर संत गाडगे जी महाराज की जयंती पर चित्र पर पुष्प अर्पित कर विचार गोष्ठी की गई जिसमें...